शनिवार, 1 नवंबर 2014

मनुष्य चरित्र के दो रूप

उपनिषदों में दो चिडियों का वृतांत आता है जो एक पेड पर बैठी हैं । इनमें से एक फल को खाती है और दूसरी फल को खाती नहीं केवल देखती है । यह चरित्र के दो पहलू के दृष्टांत हैं । हम परम् सत्य को किस रूप में देखते हैं यह चरित्र के विशिष्ट गुण का ज्ञोतक होता है । परम् सत्य को स्वामी के रूप में और अपने को सेवक के रूप में एक देखने का पहलू है और ईश्वर से कुछ माँगने के भाव में देखना दूसरा पहलू है ।   

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