परम् सत्य के ही दो रूप, परा – उच्चतर, अपरा – निम्न । परा – आत्मा, अपरा – प्रकृति । आत्मा तथा प्रकृति
निर्मित वस्तु शरीर जिसमें आत्मा को पिरोया दोनों ही परम् सत्य के ही दो रूप हैं ।
निराकार परम् सत्य ने अपने अद्भुद विज्ञान द्वारा अपने को साकार संसार के रूप में
प्रगट किया है । इस संसार की रचना का विचार भी परम् सत्य के मस्तिष्क से उत्पन्न
हुआ है और प्रकृति जिसके माध्यम से संसार को बनाया है वह भी उन्ही की रचना है ।
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