गुरुवार, 13 नवंबर 2014

सृष्टि का विज्ञान



परम् सत्य के ही दो रूप, परा उच्चतर, अपरा निम्न । परा आत्मा, अपरा प्रकृति । आत्मा तथा प्रकृति निर्मित वस्तु शरीर जिसमें आत्मा को पिरोया दोनों ही परम् सत्य के ही दो रूप हैं । निराकार परम् सत्य ने अपने अद्भुद विज्ञान द्वारा अपने को साकार संसार के रूप में प्रगट किया है । इस संसार की रचना का विचार भी परम् सत्य के मस्तिष्क से उत्पन्न हुआ है और प्रकृति जिसके माध्यम से संसार को बनाया है वह भी उन्ही की रचना है । 

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