इस कर्म प्रधान संसार में कर्म का
चुनाव ही सबसे बडा मुद्दा है । ईश्वर को बुराईयों के लिये दोषी नहीं ठहराया जा
सकता है । ईश्वर आदेशों को किसीके ऊपर थोपता नहीं है । चुनाव हर प्रत्येक व्यक्ति
का अधिकार है । परम् सत्य की अंश हर प्रत्येक आत्मा पूर्ण रूप से स्वतंत्र होती है
। प्रकृति सभी को समान रूप से अवसर प्रदान करती है । ईश्वर का लक्ष्य सच्चाई, सुंदरता और अच्छाई का होता है ।
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