रविवार, 16 नवंबर 2014

परम सत्य स्वरूप

परम् सत्य पारलौकिक, अखण्ड, चिर ब्रम्ह है जो समस्त सृष्टि के आकाश और समय के चक्र में बँधे रूपों का आधार है । परमात्मा समस्त रूपों में विकीर्त आत्मा है । परमात्मा ही समस्त रूपों में निहित आत्मा, प्रकृति की गतिविधियों का नियंत्रक रूप तथा नये रूपों की उत्पत्ति का नियंत्रक है । वह पाप के अंधकार में भटकते को ज्ञान का प्रकाश देता है, निर्बल को शक्ति देता है, दु:ख भोगते को शांति और दया देता है, वह सभी का कल्याण करता है ।  

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