गुरुवार, 6 नवंबर 2014

स्वतंत्र आत्मा

हर प्रत्येक व्यक्ति की आत्मा समान रूप से स्वतन्त्र होती है । चुनाव भिन्न होते हैं इसलिये बुराई सम्भावित तथा घटित भी होती है । यदि चुनाव की स्वतंत्रता नहीं होगी तो संसार की घटनाये यंत्रवत् होंगी । यदि आदेशों द्वारा त्रुटि, भद्दगी, और बुराई के शमन की कवायद की जावेगी तो सच्चाई, सुंदरता और अच्छाई की खोज़ समाप्त हो जावेगी । यदि सच्चाई, सुंदरता और अच्छाई को पाना है तो त्रुटि, भद्दगी और बुराई का शमन करना होगा । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें