मंगलवार, 28 अक्टूबर 2014

सत्य स्वरूप

गुरू योगेश्वर श्रीकृष्ण नारद को अपना सत्य रूप बताते हुये कहते हैं कि मैं अ-दृष्य हूँ, गंध-रहित हूँ, मुझे स्पर्ष नहीं किया जा सकता है, गुण-रहित हूँ, मेरी विभक्ति सम्भव नहीं है, अजन्मा हूँ, शाश्वत् हूँ, चिर हूँ, और क्रिया से च्युत् हूँ | 

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