इस परिवर्तनशील संसार में सभी कुछ समय के साथ समाप्त होने
वाला है । किस भी स्वरूप का जन्म हुआ है उसका अंत निश्चित है । इस सत्य के बावज़ूद
भी संसार का एक स्वरूप बना हुआ है । इससे विदित है कि इस संसार के पीछे तथा इस
संसार के अंदर भी कोई ऐसा अपरिवर्तनीय सत्य भी निहित है जो कि समय के साथ समाप्त
होने वाला नहीं हैं । इस परम् सत्य को जानना ही इस नश्वर संसार का सबसे बडा ज्ञेय
है । इस दृष्य संसार की भाँति वह परम् सत्य दृष्य नहीं है । इस परम् सत्य को जानना
विज्ञान एवं धर्म दोनों के लिये ही एक चुनौती है । इस परम् सत्य को खोजना किसी भी
दर्शन का विषय नहीं है फिरभी इसकी अनुभूति अपने अंत:करण में किये जाने के अनुभव से
इसे जानना धर्म दर्शन का विषय अवश्य है ।
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