बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

मध्यमिका बौद्धमत

यह सम्प्रदाय परम् सत्य को शून्य द्वारा व्यक्त करता है । इस अभिव्यक्ति का कारण व्यक्त करते हुये बताते हैं कि परम् सत्य को कोई भी नाम देने से उसके अपरिमित सामर्थ्य को सीमित व्यक्त करने का भय है जो कि भ्रामक होगा । । इस मतावलम्बियों का कहना है कि इस परम् सत्य को तभी पाया जा सकता है जबकि सभी द्वैत उस परम् सत्य में विलीन हो जाँय | 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें